
'हमें हर रात कोई दवा दी जाती थी, जिसके कारण नशा सा होता था। आंटी हमें बृजेश सर के कमरे में सोने के लिए कहती थीं, जहां पर वो कई आने-जाने वालों से मिला करते थे। दवा ना खाने पर पिटाई और जान से मारने की धमकी दी जाती थी। कई बार हम पर गरम पानी और खौलता तेल भी फेंका जाता था। इन सब से बचने के लिए लड़कियां अपने शरीर को शीशे से काट देती थीं, जिससे कि उन्हें गंदे काम में ना ढ़केला जा सके।'
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